Monday, December 15, 2014

उम्मीदों की सड़क नहीं मिलती , खुशियों का आसमां नहीं मिलता
यहाँ किसी को अपने , सपनों का जहां नहीं मिलता ?
तुम कहते हो, क्यूँ मरे जा रहें हो ?
प्यारे इस महंगाई में, जिन्दा रहने का, "सस्ता" सामान नहीं मिलता |

देर तक जिन्दा रहते है अक्सर वो , जिनकी मौत का इंतजार होता है सब को
और जिस का इंतजार होता है घर पर रात भर ,सुबह तक वो इंसान नहीं मिलता |

कहतें है आदमी की जान का दुश्मन, खुद आदमी है यहाँ
पर किसी शख्स के चेहरे पर, खतरे का निशान नहीं मिलता ?

गम मुकम्मल मिलतें है , दर्द मुकम्मल मिलतें है
बस मुक्कमल ईमान नहीं मिलता |

मैं लिख देती हूँ चाँद , तारें, किसी की भी जिन्दगी में
पर मुझे दो वक्त की रोटी का, इनाम नहीं मिलता ||

उम्मीदों की सड़क नहीं मिलती , खुशियों का आसमां नहीं मिलता
यहाँ किसी को अपने , सपनों का जहां नहीं मिलता

 





2- Kitabo k pnno ko palat k sochta hu,

   Yu palat jaye meri zindagi to kya baat hai Khwabo me roz milte hai jo,

  Aaj hkikat me mil jaye to kya baat hai Kuch matlab k liye dhundte hai mujhe, 

  Bin matlb koi aaye to kya bat hai Katl krke to sab le jaynge dil mera,

  Koi bato se le jaye to kya baat hai, jo sharifo ki shrafat me bat na ho,

  Ek sharabi keh jaye to kya bat hai. Apne jinda rhne tk to khushi dunga sbko, 

 Jo kisi ko meri maut khush kar jaye to kya Baat Hai..!!

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